Aadhyatmik Bharat
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कब मनाएं संक्रांति 14 या 15 जनवरी
कब मनाएं संक्रांति 14 या 15 जनवरी?
पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर
07 मिनट बजे से शाम 6 बजे तक मकर संक्रांति का महापुण्य काल रहेगा. विद्वानों का मानना है कि सूर्य का गोचर जिस जिस दिन होता है, उसी दिन संक्रांति मनाना शास्त्रसम्मत होता है. इस आधार पर *मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाना उचित बताया जा रहा है* , भले ही संक्रांति की अवधि 15 जनवरी तक रहे. वहीं, पंचांग के मुताबिक,माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से होगी और 14 जनवरी शाम 05 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी ऐसे में 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर ही षटतिला एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा । *इस बार खिचड़ी पर्व को लेकर क्यों है
भ्रम?* मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है.
परंपरा के अनुसार,इस दिन तिल, गुड़, चावल, उड़द और खिचड़ी का दान किया जाता है. लेकिन इस वर्ष 14 जनवरी को षटतिला एकादशी होने के कारण कुछ विद्वान खिचड़ी पर्व 15 जनवरी, यानी द्वादशी तिथि को मनाने की सलाह दे रहे हैं. शास्त्रों के अनुसार,एकादशी के दिन व्रती के लिए चावल का सेवन वर्जित माना गया है. इसी कारण चावल से जुड़ा दान और खिचड़ी पर्व द्वादशी को करना अधिक उपयुक्त बताया गया है.आप चाहें तो 14 जनवरी को शाम 5 बजकर 52 मिनट के बाद चावल और खिचड़ी का दान कर सकते हैं क्योंकि इस समय तक एकादशी तिथि का समापन हो जाएगा।
क्या एकादशी के दिन चावल का दान दोषपूर्ण है?
इस बार लोगों में इस बात को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी के संयोग के कारण क्या चावल का दान होगा. विष्णु पुराण के अनुसार,दान में चावल देने से दोष नहीं लगता है. हालांकि, व्रत रखने वाले व्यक्ति के लिए चावल का सेवन निषेध बताया गया है. इसलिए, जो श्रद्धालु एकादशी का व्रत रख रहे हैं,वे 15 जनवरी को द्वादशी पर खिचड़ी दान और व्रत पारण कर सकते हैं।
क्यों खास है साल 2026 की मकर संक्रांति ?
इस साल मकर संक्रांति पर सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बहुत ही शुभ माना जा रहा है.ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना फल देने वाला होता है. यही वजह है कि श्रद्धालुओं में इस बार मकर संक्रांति को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है|
चैत्र मास में धार्मिक महत्व और सावधानियाँ
चैत्र मास के आगमन के संदर्भ में यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ सामान्य जानकारियाँ, जैसे कि चैत्र मास का महत्व, उपासना की विधियाँ, आदि।
चैत्र मास का महत्व:
हिन्दू धर्म में चैत्र मास को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मास को पहला महीना माना जाता है और इसका आरंभ नवरात्रि के पर्व के साथ होता है। इस माह में ही वसंत ऋतु का आगमन होता है, जो की प्रकृति में नई ऊर्जा और उत्साह लाता है। चैत्र में सूर्य राशि चक्र के पहले राशि, अर्थात मेष राशि में प्रवेश करता है। यह मान्यता है कि इस मास में पूजा-पाठ और ध्यान करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
चैत्र मास में क्या करें:
1. चैत्र मास के आरंभ में सूर्योदय के पहले ध्यान और योग करें। यह आपको तनावमुक्त और स्वस्थ बनाए रखेगा।
2. सूर्य, मां दुर्गा, और भगवान राम की पूजा करें। यह संकटों को दूर करता है और जीवन में शांति लाता है।
3. पेड़-पौधों को नियमित रूप से जल से सींचें। यह एक पुण्यकर क्रिया है और प्रकृति के प्रति सहयोग का एक उत्तम उदाहरण है।
चैत्र मास में क्या न करें:
1. इस महीने में भक्ति और संयम का विशेष महत्व है। गर्मियों के आगमन के साथ ही बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
2. अनाज की बजाय फलों का ज्यादा सेवन करें। इससे प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है।
3. बासी भोजन न खाएं। यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।





